PM Modi Canada Visit 2026: कूटनीतिक बर्फ पिघली! प्रधानमंत्री मोदी के दिसंबर दौरे से भारत-कनाडा रिश्तों में आएगी नई गर्माहट

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ उच्चस्तरीय चर्चा के बाद तय हुआ 11-12 दिसंबर का कार्यक्रम; CEPA, रक्षा, हाई-टेक और इमिग्रेशन नीतियों पर टिकी पूरी दुनिया की नजरें
नई दिल्ली। PM Modi Canada Visit 2026: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर एक बार फिर भारत और कनाडा के संबंधों को लेकर बड़ी हलचल तेज हो गई है। कभी कूटनीतिक तल्खी, तो कभी असहज संवाद के दौर से गुजरने वाले दोनों देशों के रिश्ते अब एक अहम और निर्णायक मोड़ पर खड़े दिखाई दे रहे हैं।
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 11 और 12 दिसंबर 2026 को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर कनाडा की यात्रा (PM Modi Canada Visit 2026) करेंगे। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ओटावा स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग और जन-सामान्य (पीपल-टू-पीपल) के आपसी संबंधों को नई ऊंचाइयां देना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश अपने रिश्तों को अधिक व्यावहारिक, संतुलित और परिणामोन्मुख बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
कैलगरी से ओटावा तक हलचल: मार्क कार्नी की घोषणा और यात्रा का पूरा खाका
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने हाल ही में कैलगरी के एक स्थानीय रेस्तरां में आम नागरिकों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के इस आगामी दौरे की आधिकारिक पुष्टि की थी। उन्होंने बताया कि उनकी प्रधानमंत्री मोदी से हाल ही में सकारात्मक बातचीत हुई है, जिसके बाद इस ऐतिहासिक यात्रा की रूपरेखा तैयार की गई है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अपने इस दौरे के दौरान ओटावा और टोरंटो जैसे प्रमुख शहरों का दौरा करेंगे। कनाडाई प्रधानमंत्री ने यह संकेत भी दिए हैं कि कूटनीतिक व्यस्तताओं और वार्ताओं के एजेंडे को देखते हुए इस कार्यक्रम को और आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
ओटावा स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति बनाए रखने और विभिन्न क्षेत्रों में ठोस व परिणामदायक नतीजे हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्धता जताई है।
तल्खी से संवाद और संवाद से सहयोग तक: कूटनीतिक दूरियों को पाटने की चुनौती
पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत और कनाडा के कूटनीतिक रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव और गंभीर चुनौतियां देखने को मिली हैं।
राजनीतिक मतभेदों, सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशीलता और आपसी भरोसे में आई गिरावट ने दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों को प्रभावित किया था। ऐसे जटिल और संवेदनशील माहौल में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधा, स्पष्ट और उच्चस्तरीय संवाद रिश्तों को सामान्य पटरी पर लाने के लिए बेहद आवश्यक हो जाता है। प्रधानमंत्री मोदी की यह आगामी कनाडा यात्रा इसी व्यापक और संवेदनशील कूटनीतिक परिप्रेक्ष्य का हिस्सा है।
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हालांकि, कूटनीति के जानकारों का मानना है कि किसी एक अकेले दौरे से दशकों पुरानी या हालिया सभी दूरियां रातों-रात समाप्त नहीं हो जाएंगी, लेकिन यह यात्रा एक ठोस शुरुआत जरूर साबित हो सकती है।
इस पूरी कूटनीतिक कसरत की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों सरकारें आपसी मतभेदों वाले संवेदनशील मुद्दों पर पारदर्शी संवाद को कितना आगे बढ़ाती हैं और रणनीतिक तथा आर्थिक सहयोग को कागजी समझौतों से निकालकर धरातल पर कितना उतार पाती हैं।
कनाडा की नई कार्नी सरकार के साथ भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट और संतुलित है, मतभेदों को परिपक्वता से संभालना, राष्ट्रीय संप्रभुता व हितों की रक्षा करना और उन तमाम क्षेत्रों में आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाना जहाँ दोनों देशों की साझी व्यावसायिक व सामरिक भलाई जुड़ी हो।
व्यापार और निवेश के नए क्षितिज: CEPA समझौते पर टिकी दुनिया की निगाहें
भारत और कनाडा के बीच आर्थिक साझेदारी और निवेश का दायरा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई प्रमुख आर्थिक महाशक्ति है, जबकि कनाडा अपने अपार प्राकृतिक संसाधनों, उन्नत तकनीकी बुनियादी ढांचे, उच्च स्तरीय शिक्षा प्रणाली और मजबूत निवेश क्षमताओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।
दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग में विस्तार होने से भारतीय उद्योगों, सेवा क्षेत्र (Service Sector), तकनीकी स्टार्टअप्स और निर्यातकों के लिए उत्तरी अमेरिकी बाजार में प्रवेश के नए रास्ते खुलेंगे। दूसरी ओर, कनाडा के लिए भारत का विशाल, युवा और लगातार फैलता हुआ उपभोक्ता बाजार दीर्घकालिक व टिकाऊ साझेदारी के अनगिनत अवसर प्रस्तुत करता है।
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हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) से जुड़ी वार्ताओं को जल्द से जल्द तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने के महत्व पर विशेष जोर दिया गया था।
यदि इस बहुप्रतीक्षित CEPA समझौते पर आने वाले दिनों में सार्थक और निर्णायक प्रगति होती है, तो दोनों देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं के मुक्त व्यापार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), बाजार तक सीधी पहुंच और कॉर्पोरेट साझेदारियों को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, किसी भी वृहद आर्थिक समझौते का अंतिम और वास्तविक स्वरूप दोनों पक्षों के बीच होने वाली तकनीकी वार्ताओं और तय की जाने वाली शर्तों पर ही निर्भर करेगा।
PM Modi Canada Visit 2026: ऊर्जा सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों की साझेदारी: भविष्य की जरूरतें
किसी भी देश की आधुनिक विदेश नीति में ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) हमेशा से सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार रही है। भारत जैसी तेजी से औद्योगिक विकास करती हुई अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा की निरंतर, भरोसेमंद और विविध आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है।
यही वजह है कि भारत वैश्विक पटल पर अपने ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं के दायरे को व्यापक बनाने और पारंपरिक के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर लगातार जोर दे रहा है।
कनाडा के पास कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम और अन्य बेशकीमती प्राकृतिक संसाधनों का एक विशाल भंडार मौजूद है। ऐसे में ऊर्जा क्षेत्र में भारत और कनाडा के बीच सहयोग की असीम संभावनाएं विद्यमान हैं। इस आगामी यात्रा के दौरान स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy), नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, आधुनिक ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) प्रणालियों और परमाणु ऊर्जा से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी गंभीर चर्चा होने की पूरी संभावना है।
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यदि ऊर्जा कूटनीति के मोर्चे पर यह बातचीत ठोस परिणामों में तब्दील होती है, तो इसका लाभ केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करने, ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण (Diversification) और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान में बेहद मददगार साबित होगा।
तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर सहयोग
आज के भू-राजनीतिक परिदृश्य में किसी भी देश की ताकत केवल उसकी सैन्य क्षमता या पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण, साइबर सुरक्षा और क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज पर नियंत्रण भी रणनीतिक संबंधों की दिशा तय कर रहा है।
भारत और कनाडा के बीच वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार (Tech Innovation) और डिजिटल इकॉनमी के क्षेत्र में मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। दोनों देशों के शीर्ष विश्वविद्यालय, प्रतिष्ठित शोध संस्थान और निजी क्षेत्र के तकनीकी दिग्गज मिलकर इस साझेदारी को एक नया आयाम दे सकते हैं।
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इसके साथ ही, आंतरिक व बाह्य सुरक्षा के मोर्चे पर भी निरंतर संवाद बनाए रखना दोनों देशों के हित में है। आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, उभरते हुए साइबर खतरे और आपराधिक नेटवर्क्स जैसी वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के बीच निर्बाध तालमेल और सूचनाओं का आदान-प्रदान अनिवार्य है।
हालांकि, सुरक्षा सहयोग को स्थायी और मजबूत बनाने के लिए दोनों सरकारों के बीच अटूट आपसी विश्वास, संवेदनशील खुफिया जानकारियों के जिम्मेदार साझाकरण और हर पेचीदे मुद्दे पर स्पष्ट व पारदर्शी बातचीत की सख्त जरूरत होगी।
PM Modi Canada Visit 2026: विदेश मंत्री अनीता आनंद की भारत यात्रा और कूटनीतिक जमीन की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी कनाडा दौरे (PM Modi Canada Visit 2026) से ठीक पहले कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद ने भारत का आधिकारिक दौरा करके इस उच्चस्तरीय यात्रा के लिए एक मजबूत कूटनीतिक जमीन तैयार कर दी थी। अपनी इस भारत यात्रा के दौरान उन्होंने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से उच्चस्तरीय मुलाकात की थी।
कनाडाई विदेश मंत्री के साथ हुई इस अहम बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया था कि भारत, कनाडा के साथ एक पूरी तरह रचनात्मक, परिपक्व और दूरदर्शी रणनीतिक साझेदारी विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिससे दोनों देशों के नागरिकों को ठोस और वास्तविक लाभ मिल सके।
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प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी विवरण के अनुसार, इस मैराथन बैठक में व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा, आंतरिक सुरक्षा, ऊर्जा, उच्च शिक्षा, लोगों के आपसी जुड़ाव (People-to-People Ties) और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग सहित तमाम समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
इसके अलावा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अनीता आनंद के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापारिक निवेश, शैक्षणिक आदान-प्रदान, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में अब तक हुई प्रगति की गहन समीक्षा की थी। इन सभी उच्चस्तरीय बैठकों से यह साफ संकेत मिलते हैं कि दोनों देश अपने बिगड़े हुए रिश्तों को चरणबद्ध और व्यवस्थित ढंग से पटरी पर लाने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं।
भारत की स्वतंत्र विदेश नीति: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि और खुले रास्ते
प्रधानमंत्री मोदी की यह कनाडा यात्रा (PM Modi Canada Visit 2026) भारत की व्यापक, संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति के कुछ बेहद बुनियादी और महत्वपूर्ण पहलुओं को भी रेखांकित करती है। भारतीय कूटनीति का हमेशा से यह मूलमंत्र रहा है कि राष्ट्रीय संप्रभुता, रणनीतिक स्वायत्तता, आर्थिक हितों की सुरक्षा और दुनिया भर के देशों के साथ व्यावहारिक सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
इस पूरी कूटनीति के चार प्रमुख स्तंभ स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं:
- रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): भारत कभी भी किसी एक वैश्विक शक्ति केंद्र पर अपनी निर्भरता नहीं बढ़ाता, बल्कि वह दुनिया के अलग-अलग देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप संतुलित संबंध स्थापित करता है। कनाडा के साथ संवाद इसी व्यापक और स्वतंत्र दृष्टिकोण का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
- आर्थिक कूटनीति (Economic Diplomacy): आज के दौर में भारत की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य भारी मात्रा में विदेशी निवेश आकर्षित करना, अपने निर्यात को नई गति देना, उच्च तकनीक हासिल करना और भारतीय उद्योगों के लिए वैश्विक बाजार तैयार करना है। CEPA पर चल रही बातचीत इसी आर्थिक कूटनीति का मुख्य हिस्सा है।
- सुरक्षा और संप्रभुता (Security & Sovereignty): अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा चिंताओं और राष्ट्रीय संप्रभुता से कभी कोई समझौता नहीं करता। कनाडा के साथ भविष्य के स्थायी और भरोसेमंद संबंधों की बहाली के लिए इन संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट संवाद होना अनिवार्य है।
- बहुपक्षीय सहयोग (Multilateral Cooperation): जलवायु परिवर्तन, वैश्विक हरित ऊर्जा संक्रमण, वित्तीय स्थिरता और उभरती हुई तकनीकों जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत दुनिया के तमाम देशों के साथ मिलकर काम करता है। कनाडा के साथ साझेदारी इन वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
संक्षेप में कहें तो भारत की इस नीति को केवल एक तात्कालिक सुधार की कसरत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह राष्ट्रीय हितों की पूर्ण रक्षा करते हुए कूटनीतिक सहयोग के हर व्यावहारिक अवसर को भुनाने की एक सुविचारित रणनीति है।
भारतीय समुदाय, प्रवासी और शिक्षा: रिश्तों की मजबूत सामाजिक डोर
किसी भी देश के बीच कूटनीतिक और राजनीतिक संबंधों की असल ताकत उस देश के आम नागरिकों और प्रवासियों के बीच के आपसी संबंधों से तय होती है। भारत और कनाडा के संबंधों का सबसे मजबूत स्तंभ भी दोनों देशों के लोगों के बीच का जीवंत संपर्क है। कनाडा की धरती पर भारतीय मूल के नागरिकों और प्रवासी भारतीयों की एक बहुत बड़ी, प्रभावशाली और सम्मानित उपस्थिति है।
इसके अलावा, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कई दशकों से भारतीय छात्रों का कनाडा जाना और वहाँ के शैक्षणिक संस्थानों के साथ अकादमिक आदान-प्रदान दोनों देशों को सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर बेहद करीब लाता है।
दुनिया भर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक शोध संस्थानों, कॉर्पोरेट उद्यमियों और कुशल पेशेवरों के बीच आपसी सहयोग बढ़ने से व्यापारिक तथा तकनीकी साझेदारियों को भी स्वतः मजबूती मिलती है।
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हालांकि, कनाडाई सरकार की तरफ से वीजा नियमों, आव्रजन (Immigration) नीतियों और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों से जुड़े प्रावधानों में स्थिरता और स्पष्टता होना दोनों देशों के नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि उच्चस्तरीय राजनीतिक वार्ताओं के साथ-साथ इन मानवीय और सामाजिक विषयों पर भी व्यावहारिक और सकारात्मक प्रगति होती है, तो द्विपक्षीय रिश्तों का सीधा लाभ दोनों देशों के आम नागरिकों तक पहुँचेगा।
राजनीतिक विश्लेषण: क्या दिसंबर 2026 का यह दौरा साबित होगा ऐतिहासिक टर्निंग Point?
राजनीतिक विश्लेषकों और कूटनीति के जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस आगामी कनाडा यात्रा (PM Modi Canada Visit 2026) का महत्व केवल इस औपचारिक तथ्य तक सीमित नहीं है कि दोनों देशों के शीर्ष नेता आपस में मिलेंगे। इस यात्रा का असली और दूरगामी महत्व इस बात में निहित होगा कि इस मुलाकात के ठीक बाद दोनों देशों के रिश्ते व्यावहारिक धरातल पर किस दिशा और गति से आगे बढ़ते हैं।
आर्थिक मोर्चे पर यदि CEPA वार्ता किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुँचती है, निवेश के नए रास्ते खुलते हैं और ऊर्जा सहयोग का दायरा बढ़ता है, तो यह दोनों सरकारों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बन जाएगी। व्यापारिक संबंधों में स्थिरता आने से दोनों देशों के व्यावसायिक समुदायों (Business Communities) को एक बेहद सकारात्मक और उत्साहजनक संदेश मिलेगा।
कूटनीतिक स्तर पर यह यात्रा दोनों पक्षों को तमाम संवेदनशील और पेचीदे मुद्दों पर खुला संवाद जारी रखने का एक बेहतरीन मंच प्रदान करेगी। हालांकि, आपसी विश्वास की स्थायी बहाली के लिए केवल सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयान या कूटनीतिक शिष्टाचार पर्याप्त नहीं होंगे; इसके लिए नियमित उच्चस्तरीय संपर्क, पूरी पारदर्शिता और एक-दूसरे की वैध चिंताओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाना नितांत आवश्यक होगा।
वैश्विक रणनीति के फलक पर जहाँ भारत अपने आर्थिक और सामरिक संबंधों के दायरे का लगातार विस्तार करना चाहता है, वहीं कनाडा भी उत्तर अमेरिकी प्राथमिकताओं से आगे निकलकर एशिया की बड़ी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग के नए द्वार तलाशने का इच्छुक है।
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इन दोनों देशों की परस्पर पूरक और साझा जरूरतों से ही इनके रिश्तों में एक नई और सकारात्मक गति आने की प्रबल संभावना बन रही है। फिर भी, यह यथार्थवादी दृष्टि रखना भी जरूरी है कि किसी भी प्रस्तावित उच्चस्तरीय यात्रा की घोषणा मात्र से सभी पुराने विवादों का जादुई समाधान नहीं हो जाता।
इस पूरी कूटनीतिक यात्रा की असली परीक्षा इस बात में होगी कि मुलाकातों के दौरान क्या फैसले लिए जाते हैं, आधिकारिक दस्तावेजों में किन समझौतों को जगह मिलती है और जमीन पर उनका क्रियान्वयन कितनी ईमानदारी से होता है।
रिश्तों के नए अध्याय की शुरुआत और ठोस नतीजों का इंतजार
कहा जा सकता है कि भारत और कनाडा के बीच आगामी 11 और 12 दिसंबर 2026 को होने वाली यह उच्चस्तरीय मुलाकात ऐसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय पर हो रही है जब दोनों देशों के सामने अभूतपूर्व आर्थिक अवसरों के साथ-साथ कुछ जटिल कूटनीतिक चुनौतियां भी मौजूद हैं।
व्यापार, ऊर्जा, उन्नत तकनीक, आंतरिक सुरक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की जितनी अधिक संभावनाएं आज मौजूद हैं, उतना ही यह भी जरूरी है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के प्रति अविश्वास की धुंध को छांटकर मजबूत भरोसे की नींव रखें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह आगामी दौरा (PM Modi Canada Visit 2026) दोनों देशों को कूटनीतिक दूरियों को मिटाकर संबंधों के भविष्य की एक नई और स्पष्ट दिशा तय करने का स्वर्णिम अवसर प्रदान करता है।
यदि यह उच्चस्तरीय संवाद ठोस नीतिगत फैसलों और ज़मीनी समझौतों में तब्दील हो जाता है, तो यह निःसंदेह भारत-कनाडा के द्विपक्षीय इतिहास का एक बेहद सफल और मील का पत्थर साबित होगा।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का यह साफ संदेश है कि तमाम मतभेदों के बीच भी संवाद का सिलसिला टूटना नहीं चाहिए, व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के बीच सहयोग के रास्ते खुले रहने चाहिए और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए भविष्य की एक साझी साझेदारी का ताना-बाना बुना जाना चाहिए।
अब पूरी दुनिया की नजरें आगामी दिसंबर महीने पर टिकी हैं कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में केवल ऊपरी गर्माहट लाती है या फिर दीर्घकालिक और ठोस परिणामों का एक नया इतिहास रचती है।
