Muhammad Sarwar Lashkar-e-Taiba: पाकिस्तान में अमेरिकी सूचीबद्ध आतंकवादी मुहम्मद सरवर की मौत

पाकिस्तान में मुहम्मद सरवर की मौत कैसे हुई? लश्कर-ए-तैयबा में निभाई थी अहम भूमिका
लाहौर। एजेसीं, Muhammad Sarwar Lashkar-e-Taiba: पाकिस्तान के लाहौर में रविवार को मुहम्मद सरवर की मौत हो गई। अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जा चुके सरवर की मौत की जानकारी पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के एक प्रवक्ता ने बयान जारी कर दी। सरवर पंजाब में पार्टी के अध्यक्ष थे।
पार्टी के प्रवक्ता के अनुसार, सरवर घर से नमाज अदा करने के लिए मस्जिद जा रहे थे। इसी दौरान वह अचानक गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। हालांकि, पार्टी की ओर से उनकी मौत का सटीक कारण नहीं बताया गया।
वहीं, पाकिस्तान के 24न्यूजएचडी टीवी चैनल की रिपोर्ट में दावा किया गया कि सीढ़ियों से गिरने के कारण सरवर के सिर में चोट लगी थी, जो उनकी मौत की वजह बनी। इस तरह उनकी मौत को लेकर पार्टी के बयान और मीडिया रिपोर्ट में उपलब्ध विवरण अलग-अलग स्तर के हैं।
मुहम्मद सरवर की मौत के बाद पीएमएमएल के कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। इनमें खालिद मसूद सिंधु, सैफुल्लाह कसूरी, हाफिज तल्हा सईद, याकूब शेख, खालिद नईक गुज्जर और मुजम्मिल इकबाल हाशमी शामिल हैं।
मुजम्मिल इकबाल हाशमी ने सरवर की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि पार्टी ने एक मजबूत और निडर नेता खो दिया है। सरवर की नमाज-ए-जनाजा रविवार देर रात लाहौर के चुबुर्जी इलाके में स्थित जमात-उद-दावा के मुख्यालय जामिया अल-कदसिया में अदा की जानी थी।
पीएमएमएल और हाफिज सईद के संगठन के बीच क्या संबंध है?
पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग यानी पीएमएमएल, मुंबई आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा से अलग होकर बना राजनीतिक दल है। सरवर इसी पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष थे।
हाफिज सईद 2019 से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है। अधिकारियों के अनुसार, उसे आतंकवाद के लिए धन जुटाने से संबंधित कई मामलों में कई साल की सजा सुनाई गई थी।
मुहम्मद सरवर का नाम इससे पहले लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों और उसके वित्तीय नेटवर्क से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के संदर्भ में सामने आया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, सरवर लंबे समय तक लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करता रहा और संगठन के लिए धन जुटाने तथा उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में उसकी भूमिका थी।
अमेरिका ने मुहम्मद सरवर को आतंकवादी कब घोषित किया था?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने वर्ष 2016 में मुहम्मद सरवर और लश्कर-ए-तैयबा के एक अन्य शीर्ष कमांडर शाहिद महमूद को विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।
इस कार्रवाई का घोषित उद्देश्य लश्कर-ए-तैयबा के लिए वित्तीय सहायता जुटाने और उसे उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क को बाधित करना था। OFAC के अनुसार, दोनों को संगठन की ओर से या उसके प्रतिनिधि के रूप में काम करने के कारण प्रतिबंधित किया गया था।
इस फैसले के तहत अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली उनकी संपत्तियों और उन संपत्तियों में उनके हितों को अवरुद्ध कर दिया गया था। यह कदम संगठन की आर्थिक गतिविधियों और उसके संचालन को समर्थन देने वाले नेटवर्क पर दबाव बनाने की व्यापक कार्रवाई का हिस्सा था।
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अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने उस समय कहा था कि सरवर और महमूद लश्कर-ए-तैयबा के अभियानों को समर्थन देने के लिए धन जुटाने और उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए जिम्मेदार थे।
OFAC ने यह भी स्पष्ट किया था कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल दोनों की गतिविधियों को सामने लाना नहीं था, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा के वित्तीय नेटवर्क और हिंसक आतंकवादी हमले करने की उसकी क्षमता को बाधित करना भी था।
लश्कर-ए-तैयबा में मुहम्मद सरवर की क्या भूमिका थी?
OFAC के अनुसार, मुहम्मद सरवर ने 10 साल से अधिक समय तक लाहौर में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर के रूप में काम किया था। इस अवधि के दौरान उसने संगठन में नेतृत्व से जुड़ी कई भूमिकाएं निभाईं।
अमेरिकी एजेंसी के रिकॉर्ड के मुताबिक, सरवर कम से कम जनवरी 2015 से लश्कर-ए-तैयबा के लाहौर प्रमुख के तौर पर काम कर रहा था। इस पद पर रहते हुए उसके संगठन के शीर्ष स्तर पर सक्रिय आतंकियों से संबंध थे।
OFAC ने बताया था कि वर्ष 2012 से 2013 के बीच सरवर ने लश्कर-ए-तैयबा (Muhammad Sarwar Lashkar-e-Taiba) के विदेश मामलों के प्रमुख हाफिज अब्दुल रहमान मक्की के साथ काम किया था। वर्ष 2013 की शुरुआत में मक्की ने पाकिस्तान के भीतर यात्रा संबंधी खर्चों के लिए सरवर से पैसे मांगे थे।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने नवंबर 2010 में कार्यकारी आदेश 13224 के तहत हाफिज अब्दुल रहमान मक्की को भी आतंकवादी घोषित किया था। इस तरह सरवर के संबंध संगठन के उन वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी बताए गए थे, जिन पर अमेरिका पहले ही प्रतिबंध लगा चुका था।
Muhammad Sarwar Lashkar-e-Taiba: मुहम्मद सरवर कब से लश्कर के लिए धन जुटा रहा था?
OFAC के अनुसार, सरवर का लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ाव 2000 के दशक की शुरुआत से था। संगठन के लाहौर अमीर के तौर पर वह सीधे तौर पर धन जुटाने की गतिविधियों में शामिल था।
अमेरिकी एजेंसी के मुताबिक, सरवर संगठन (Muhammad Sarwar Lashkar-e-Taiba) के लिए धन जुटाने और उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने के उद्देश्य से पाकिस्तान की औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल करता था। यह गतिविधियां संगठन की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने वाले नेटवर्क का हिस्सा थीं।
वर्ष 2008 में सरवर ने कारोबारियों के कई प्रतिनिधिमंडलों को लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों पर ले जाकर संगठन के लिए चंदा मांगा था। OFAC के रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2009 के मध्य तक वह लाहौर में संगठन के लिए धन जुटाने वाले विभाग के दो प्रमुख लोगों में शामिल हो चुका था।
इन विवरणों से पता चलता है कि अमेरिकी अधिकारियों की नजर में सरवर की भूमिका केवल संगठन के स्थानीय नेतृत्व तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसके वित्तीय संसाधन जुटाने और धन के हस्तांतरण से जुड़े काम में भी उसकी भागीदारी थी।
मुहम्मद सरवर की मौत के बाद क्या अहम है?
मुहम्मद सरवर की मौत की खबर ऐसे व्यक्ति से जुड़ी है, जिसे अमेरिका ने वर्ष 2016 में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों और उसके वित्तीय नेटवर्क में कथित भूमिका के आधार पर वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। लाहौर में उसकी मौत की सूचना पीएमएमएल ने दी, जबकि मौत के कारण को लेकर पार्टी ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। सीढ़ियों से गिरने और सिर में चोट लगने की बात पाकिस्तानी टीवी चैनल की रिपोर्ट में कही गई है।
Muhammad Sarwar Lashkar-e-Taiba से जुड़ा यह घटनाक्रम संगठन के पुराने नेतृत्व, उसके वित्तीय नेटवर्क और अमेरिकी प्रतिबंधों के इतिहास को फिर चर्चा में लाता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी मौत को किसी हमले या अन्य साजिश से जोड़ने का कोई पुष्ट आधार सामने नहीं आता।
