Manipur Kamjong Violence: मणिपुर में 28 घरों को बनाया गया निशाना, नागा और कुकी समुदाय के लोग बेघर

संदिग्ध उग्रवादियों और अज्ञात हथियारबंद उपद्रवियों ने नागा तथा कुकी समुदाय की बस्तियों को निशाना बनाया
इंफाल। एजेंसी, Manipur Kamjong Violence: मणिपुर में जातीय हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कामजोंग जिले और आसपास के इलाकों में पिछले 24 घंटे के दौरान हुई अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 28 घरों को आग के हवाले कर दिया गया।
पुलिस और अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध उग्रवादियों और अज्ञात हथियारबंद उपद्रवियों ने नागा तथा कुकी समुदाय की बस्तियों को निशाना बनाया। हमलों के बाद प्रभावित परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े। कई लोगों ने जंगलों में शरण ली, जबकि कुछ परिवार सुरक्षा के लिए पास के सेना शिविर में चले गए।
Manipur Kamjong violence से जुड़ी इन घटनाओं ने सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक ओर नागा समुदाय के गांवों में खाली पड़े मकानों को जलाए जाने की खबर सामने आई, तो दूसरी ओर कुकी समुदाय के चासाद गांव में आगजनी के बाद बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापित होना पड़ा। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर एक कार पर गोलीबारी की घटना में दो लोग घायल हुए।
नागा समुदाय के कितने घरों में लगाई गई आग?
मणिपुर के सीमावर्ती इलाकों में नागा समुदाय की बस्तियों पर हमले की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। रविवार को म्यांमार के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक पिलोंग और स्काइप गांवों में अज्ञात उपद्रवियों ने नागा समुदाय के लोगों के 13 खाली घरों में आग लगा दी।
पुलिस के बयान के अनुसार, घटना के बाद जरूरी सुरक्षा उपाय किए गए हैं। पिलोंग समेत म्यांमार सीमा के पास स्थित नागा गांव पहले भी हमलों का सामना कर चुके हैं। पूर्व में हुई घटनाओं के बाद इन मकानों को खाली कर दिया गया था। ऐसे में रविवार को हुई आगजनी में 13 खाली घरों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर गोलीबारी में कौन घायल हुआ?
Manipur Kamjong violence के बीच रविवार सुबह गोलीबारी की एक और घटना सामने आई। अज्ञात हथियारबंद उपद्रवियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर ग्वालटाबी और महादेवा के बीच गुजर रही एक कार पर गोलियां चलाईं। इस हमले में दो लोग घायल हो गए।
यह घटना उखरुल जिले में लितान पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में हुई। सीमावर्ती और आसपास के इलाकों में आगजनी के साथ गोलीबारी की घटनाएं सामने आने से स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कार सवार दोनों घायलों की पहचान और उनकी स्थिति का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
Manipur Kamjong Violence: चासाद गांव में कुकी समुदाय के 15 घरों के साथ क्या हुआ?
कामजोंग जिले के चासाद गांव में शनिवार रात संदिग्ध उग्रवादियों ने हमला किया। अधिकारियों के अनुसार, हमलावरों ने कुकी समुदाय के 15 घरों में आग लगा दी। इस घटना के बाद गांव में रहने वाले बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा।
प्रभावित परिवारों ने जान बचाने के लिए जंगलों और पास स्थित सेना शिविर में शरण ली। घरों में आग लगाए जाने के कारण लोगों के सामने तत्काल सुरक्षा और रहने की जगह की समस्या खड़ी हो गई।
इसे भी पढें: India Digital Public Infrastructure: भारत का डिजिटल ढांचा दुनिया के सबसे प्रभावी सुधारों में क्यों शामिल हुआ?
यह घटना गांव पर हुए एक हमले में कुकी समुदाय के एक नागरिक की मौत और चार अन्य लोगों के गोली लगने से घायल होने के कुछ घंटे बाद हुई। लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
सुरक्षा के लिए कौन-कौन से बल तैनात किए गए?
पुलिस के मुताबिक, प्रभावित इलाके में हालात को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और कामजोंग पुलिस की संयुक्त टुकड़ी तैनात की गई है।
सुरक्षा बलों की तैनाती का उद्देश्य इलाके में स्थिति को नियंत्रण में लाना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, आगजनी और गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओं के बीच प्रभावित परिवारों को अपने घरों से दूर रहना पड़ा है।
उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने हिंसा पर क्या कहा?
मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने चासाद गांव में हुई हिंसा की निंदा की है। उन्होंने कुकी समुदाय के नागरिक की मौत पर दुख जताया और घायल गांव के नेताओं तथा विस्थापित परिवारों की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की।
किपगेन ने घरों को जलाने की घटना को असहनीय अपराध बताया। उन्होंने कहा कि नागरिकों की जान और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उपमुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही उन्होंने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के निर्देश भी दिए। उनके बयान में प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया।
कामजोंग जिला मुख्यालय में भी हुई गोलीबारी
कामजोंग जिले के मुख्यालय में शनिवार रात एक अन्य हिंसक घटना (Manipur Kamjong Violence) हुई। अधिकारियों के अनुसार, प्रतिद्वंद्वी हथियारबंद समूहों ने एक गांव पर हमला किया। इस घटना में तंगखुल नागा समुदाय के तीन आम नागरिकों को गोली लगी और वे घायल हो गए।
इस तरह क्षेत्र में हिंसा का दायरा केवल आगजनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग घटनाओं में आम नागरिक भी गोलीबारी का शिकार हुए हैं। चासाद गांव में कुकी समुदाय के नागरिक की मौत, चार लोगों के घायल होने और तंगखुल नागा समुदाय के तीन नागरिकों को गोली लगने की घटनाओं ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और गंभीर बना दिया है।
मणिपुर में जातीय हिंसा में अब तक कितने लोगों की मौत हुई?
मणिपुर में फरवरी से कुकी और नागा समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। तमेंगलॉन्ग, कामजोंग, उखरुल, कांगपोकपी और नोनी जिलों में झड़पों और हिंसक घटनाओं की खबरें सामने आती रही हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन झड़पों में अब तक 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा दर्जनों घरों को आग के हवाले किया गया है। हालिया घटनाओं में नागा समुदाय के 13 खाली घर और कुकी समुदाय के चासाद गांव में 15 घर जलाए जाने की जानकारी सामने आई है।
Manipur Kamjong violence के ताजा घटनाक्रम में सबसे बड़ी चिंता आम नागरिकों की सुरक्षा और विस्थापन को लेकर है। घरों को जलाए जाने, गोलीबारी में लोगों के घायल होने और नागरिक की मौत के बाद प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर रहना पड़ रहा है।
फिलहाल, पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच इलाके में शांति बहाल करना और नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रमुख चुनौती बनी हुई है।
