Delhi Mumbai Expressway Bus Accident: कोटा हादसे पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सख्त, दिए जांच के आदेश

जयपुर।Delhi Mumbai Expressway Bus Accident: क्या देश के आधुनिक एक्सप्रेसवे सफर के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं? कोटा के नजदीक हाल ही में हुए delhi mumbai expressway bus accident ने इस गंभीर सवाल को एक बार फिर देश के सामने ला खड़ा किया है।
इस दुर्घटना के बाद हरकत में आए प्रशासनिक तंत्र ने अब सड़क सुरक्षा मानकों को लेकर बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को शासन सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें इस वीभत्स delhi mumbai expressway bus accident के तमाम पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने दो टूक शब्दों में संबंधित महकमों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस दुर्घटना की तह तक जाकर निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक या तकनीकी कोताही पाई जाती है, तो बिना किसी लिहाज के कड़ी कार्रवाई की जाए।
क्या था वह भयावह मंजर और कैसे घटी दुर्घटना?
यह खौफनाक हादसा 17 अक्टूबर को तड़के करीब 5 बजे पेश आया था। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से यात्रियों से भरी एक ट्रैवलर बस धार्मिक आस्था के केंद्र खाटूश्यामजी की ओर जा रही थी। जैसे ही वाहन कोटा सीमा के पास पहुंचा, अचानक चालक वाहन पर से अपना नियंत्रण खो बैठा।
इस delhi mumbai expressway bus accident की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अनियंत्रित बस सड़क की तयशुदा लेन और मजबूत सुरक्षा बैरियर को चीरती हुई सीधे एक गहरे नाले में जा समाई।
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इस भीषण दुर्घटना के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में कुल 8 मासूम लोगों की अकाल मौत हो गई, जबकि 16 अन्य यात्री गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
मुख्य सचिव द्वारा उठाए गए कड़े कदम और तकनीकी निर्देश
इस दर्दनाक delhi mumbai expressway bus accident के बाद शासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े निर्देश जारी किए हैं:
- बैरियर की तकनीकी गुणवत्ता की जांच: मुख्य सचिव ने दुर्घटना स्थल पर लगाए गए क्रैश बैरियर और सुरक्षा दीवारों की गुणवत्ता का तुरंत तकनीकी परीक्षण कराने का फरमान जारी किया है। यदि जांच रिपोर्ट में बैरियर निर्धारित इंजीनियरिंग मानकों के विपरीत पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार एजेंसियों पर नियमों के मुताबिक सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
- एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय: कोटा जिला कलेक्टर से घटना की पल-पल की रिपोर्ट लेते हुए मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), यातायात पुलिस और 108 एम्बुलेंस सेवा के बीच आपसी तालमेल को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया है, ताकि आपातकालीन स्थिति में घायलों को बिना एक भी पल गंवाए त्वरित सहायता मिल सके।
- कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग और इंटीग्रेशन: एक्सप्रेसवे और हाईवे पर एनएचएआई द्वारा स्थापित किए गए सीसीटीवी कैमरों को तत्काल प्रभाव से संबंधित स्थानीय थानों और अभय कमांड सेंटर के सर्वर से जोड़ने (इंटीग्रेट करने) के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इससे भविष्य में किसी भी हादसे की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी और सूचना मिलने में देरी नहीं होगी।
- पीड़ितों का निःशुल्क और उच्चस्तरीय इलाज: कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से फोन पर बातचीत कर घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी उपचाराधीन मरीजों को नियमानुसार सर्वोच्च स्तर की चिकित्सा सुविधाएं और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाए।
समीक्षा बैठक में कौन-कौन वरिष्ठ अधिकारी रहे शामिल?
इस हाई-लेवल मीटिंग में राज्य प्रशासन के कई शीर्ष चेहरे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। इनमें सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता, यातायात पुलिस महानिदेशक मालिनी अग्रवाल, शासन सचिव डॉ. जोगा राम सहित परिवहन, एनएचएआई, यातायात प्रबंधन और रोड सेफ्टी से जुड़े तमाम वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। वहीं, कोटा जिले के प्रशासनिक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े और ज़मीनी अपडेट्स साझा किए।
