Oregon School Shooting: अमेरिका के ओरेगन स्कूल में खूनी तांडव, पिता ने लगाई जान की बाजी

पिता की बहादुरी पर ट्रंप ने की जमकर तारीफ
नई दिल्ली। Oregon School Shooting: दुनिया के सबसे ताकतवर और विकसित देश अमेरिका में स्कूलों की सुरक्षा और अंधाधुंध गोलीबारी की घटनाएं लंबे समय से एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसी कड़ी में ओरेगन राज्य से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था, नागरिकों के हथियार रखने के अधिकार और आपातकालीन स्थितियों में आम आदमी की भूमिका पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
बेंड शहर स्थित सिल्वर रेल एलीमेंट्री स्कूल में हुई इस भीषण गोलीबारी (oregon school shooting) में तीन मासूम छात्रों और एक शिक्षक को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन इस खूनी संघर्ष के बीच एक साधारण पिता की असाधारण बहादुरी ने कई अन्य जिंदगियों को बचा लिया। इस पूरी घटना के केंद्र में रहे उस साहसी पिता की हर तरफ चर्चा हो रही है, जिसे दुनिया अब एक oregon school shooting father hero के रूप में याद कर रही है।
कौन हैं केलुब जियामैंको और कैसे लिया गया खतरे से मुकाबला?
इस पूरी साहसिक घटना को अंजाम देने वाले 36 वर्षीय केलुब जियामैंको पेशे से एक साधारण बढ़ई हैं और दो प्यारी बेटियों के पिता हैं। उनकी माता केंडा फ्रीमैन ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही स्कूल परिसर के भीतर गोलीबारी (oregon school shooting) की गूंज सुनाई दी, उनके बेटे ने बिना एक पल गंवाए हमलावर का डटकर सामना करने का फैसला किया।
पुलिस प्रमुख माइक क्रांट्ज द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केलुब की .40-कैलिबर पिस्तौल पूरी तरह से कानूनी रूप से उनके वाहन के अंदर रखी हुई थी। गोलियों की आवाज सुनकर वे तुरंत स्कूल के भीतर दाखिल हुए, जहाँ उन्होंने एक शिक्षक को खूंखार हमलावर से जूझते हुए देखा। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए उन्होंने तुरंत अपनी लाइसेंसी बंदूक निकाली और हमलावर पर गोली चलाकर उसे रोकने में अहम भूमिका निभाई।
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इस घटना (oregon school shooting) के बाद अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से औपचारिक बातचीत के दौरान केलुब जियामैंको की इस दिलेरी की खुले दिल से सराहना की।
“यह वाकई एक बेहद भयानक और दुखद घटना है, लेकिन शुक्र है कि उस विकट परिस्थिति में वहां एक ऐसा शख्स मौजूद था, जिसके पास बंदूक थी और वह उसका सही इस्तेमाल करना अच्छी तरह जानता था।”
– राष्ट्रपति ट्रम्प, अमेरिका
अमेरिका जैसे देश में जहाँ बंदूक संस्कृति पर हमेशा से तीखी बहस छिड़ी रहती है, किसी आम नागरिक द्वारा अपनी जान जोखिम में डालकर हथियारबंद हमलावर के सामने खड़े होना बेहद दुर्लभ माना जाता है। इस घटना ने एक बार फिर इस पुराने सवाल को जिंदा कर दिया है कि पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने से पहले कोई आम नागरिक कितनी बड़ी जान बचा सकता है।
क्या वाकई आम नागरिकों के त्वरित हस्तक्षेप से रुक जाते हैं ऐसे बड़े हमले?
इस संवेदनशील विषय पर रोशनी डालने के लिए साल 2000 से 2025 के बीच अमेरिका में हुई कुल 634 सक्रिय गोलीबारी और हमलों की घटनाओं का एक व्यापक अध्ययन किया गया है। इन आंकड़ों में केवल बंदूकों ही नहीं, बल्कि धारदार हथियारों और वाहनों का इस्तेमाल करके किए गए हमले भी शामिल थे। अध्ययन से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
- अध्ययन में पाया गया कि कुल मामलों में से 374 घटनाएं ऐसी थीं जो पुलिस के आने से पहले ही स्वतः समाप्त हो चुकी थीं।
- कम से कम 29 मामलों में हथियारबंद आम नागरिकों ने खुद आगे बढ़कर हमलावर को गोली मारकर उसके नापाक मंसूबों पर पानी फेरा।
- इसके अलावा, 31 अन्य घटनाओं में निहत्थे या सामान्य नागरिकों ने दूसरे साहसिक तरीकों का इस्तेमाल किया, जैसे हमलावर को अचानक जमीन पर दबोच लेना या उसका हथियार छीनकर उसे काबू में करना।
इस रिसर्च सेंटर के प्रवक्ता जेम्स कीथ का कहना है कि ऐसे मौकों पर जान जोखिम में डालकर आगे आने वाले लोग यह अच्छी तरह समझते हैं कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों यानी पुलिस के आने का इंतजार करने का समय नहीं होता, और कभी-कभी हमले को रोकने का एकमात्र रास्ता उनका अपना त्वरित हस्तक्षेप ही होता है।
अमेरिका में हथियार रखने के पक्ष और विपक्ष में क्या दिए जाते हैं तर्क?
संयुक्त राज्य अमेरिका में निजी तौर पर हथियार रखने के अधिकार (Second Amendment) का समर्थन करने वाले लोगों का हमेशा से यह तर्क रहा है कि एक जिम्मेदार और प्रशिक्षित नागरिक आपातकाल के दौरान अपनी, अपने परिवार की और आसपास मौजूद बेकसूर लोगों की हिफाजत करने का पूरा हक रखता है।
कई मामलों में हस्तक्षेप करने वाले इन नागरिकों के पास पुलिस या सेना में काम करने का पिछला पेशेवर अनुभव होता है, तो कई बार पूरी तरह से आम नागरिक भी अनहोनी के वक्त असाधारण सूझबूझ का परिचय देते हैं।
अमेरिका के कई राज्यों में सार्वजनिक स्थलों और शैक्षणिक परिसरों में हथियारबंद नागरिकों की भूमिका को कानूनी रूप से बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, टेक्सास राज्य ने वर्ष 2013 में एक अनूठा ‘स्कूल मार्शल कार्यक्रम’ शुरू किया था, जिसके अंतर्गत स्कूलों के कुछ चुनिंदा और प्रशिक्षित शिक्षकों तथा कर्मचारियों को परिसर के भीतर छिपकर हथियार (बंदूक) रखने की विशेष अनुमति दी गई थी।
इसके बाद, साल 2018 में ह्यूस्टन के पास स्थित एक हाईस्कूल और साल 2022 में उवाल्डे के रॉब एलीमेंट्री स्कूल में हुए दर्दनाक हादसों के बाद पूरे देश में स्कूल सुरक्षा कार्यक्रमों और सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया।
गिफर्ड्स लॉ सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार, टेक्सास राज्य में बंदूक नियंत्रण से जुड़े कानून तुलनात्मक रूप से काफी कम सख्त हैं, जबकि ओरेगन राज्य में हथियारों और उनकी सुरक्षा को लेकर नियम काफी ज्यादा सख्त माने जाते हैं।
अतीत के वे मामले जब आम नागरिकों ने मसीहा बनकर रोका खूनी तांडव
ओरेगन की यह घटना कोई इकलौती मिसाल नहीं है। अमेरिकी इतिहास में ऐसे कई रोंगटे खड़े कर देने वाले वाकये दर्ज हैं, जब साधारण नागरिकों ने अपनी जान की परवाह न किए बिना खूंखार हमलावरों का डटकर मुकाबला किया:
- ट्विन फॉल्स, इडाहो (3 अगस्त): एक स्थानीय ‘इन-एन-आउट बर्गर’ रेस्तरां में अचानक शुरू हुई गोलीबारी में तीन बेकसूर लोगों की मौत हो गई थी और सात अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उस समय मौके पर मौजूद एक ड्यूटी से बाहर (Off-duty) पुलिस अधिकारी और एक अन्य हथियारबंद नागरिक जॉर्डन सलीनास ने तत्परता दिखाते हुए हमलावर का डटकर सामना किया। जैसे ही दोनों तरफ से जवाबी फायरिंग हुई, हमलावर घबराकर पीछे हटने को मजबूर हो गया और अंततः उसने खुद को बचाने के बजाय खुदकुशी कर ली।
- व्हाइट सेटलमेंट, टेक्सास (दिसंबर 2019): ‘वेस्ट फ्रीवे चर्च ऑफ क्राइस्ट’ में रविवार की पवित्र प्रार्थना का दौर चल रहा था, तभी एक सिरफिरे ने शॉटगन से अंधाधुंध गोलियां बरसाकर दो लोगों की हत्या कर दी। बिना देर किए 71 वर्षीय जैक विल्सन नामक सतर्क नागरिक ने अपनी बंदूक निकाली और सटीक निशाना साधकर हमलावर को ढेर कर दिया। गौरतलब है कि जैक विल्सन खुद एक जाने-माने फायरआर्म्स (हथियार) ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर और रिजर्व शेरिफ डिप्टी रह चुके थे।
- सदरलैंड स्प्रिंग्स, टेक्सास (2017): एक चर्च के अंदर हुए भीषण नरसंहार में 26 मासूमों की जान चली गई थी। उस वक्त नेशनल राइफल एसोसिएशन (NRA) के पूर्व प्रशिक्षक स्टीफन विलफोर्ड अपनी व्यक्तिगत राइफल लेकर तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने अकेले ही खतरनाक हमलावर के सामने डटकर मुकाबला किया और उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके बाद उन्होंने एक गुजर रहे राहगीर की गाड़ी की मदद से उस खूंखार अपराधी का दूर तक पीछा भी किया, जिसके बाद घबराकर हमलावर ने अंततः आत्महत्या कर ली।
इन तमाम ऐतिहासिक और ताज़ा घटनाओं (से यह साफ जाहिर होता है कि जब कानून और व्यवस्था की मशीनरी किसी अप्रत्याशित संकट के समय थोड़ी देर से पहुंचती है, तब समाज के भीतर मौजूद ऐसे साहसी और जिम्मेदार नागरिक ही ढाल बनकर खड़े होते हैं।
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ओरेगन की इस घटना (oregon school shooting) ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान इस बात की ओर खींचा है कि संकट की हर घड़ी में मानवीय साहस और सतर्कता ही सबसे बड़ी ताकत साबित होती है।
