NSE Cybersecurity: एआई हैकिंग और क्वांटम खतरे से शेयर बाजार को बचाने की तैयारी

एनएसई प्रमुख ने बताई रणनीति
बिजनेस डेस्क। NSE Cybersecurity: भारतीय शेयर बाजार का दायरा जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उसके साथ जुड़े तकनीकी जोखिम भी उतनी ही गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित साइबर हमलों और क्वांटम कंप्यूटिंग के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वित्तीय बाजार की सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करना होगा।
मुंबई में आयोजित 16वें एएनएमआई इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट कन्वेंशन में चौहान ने कहा कि बदलती तकनीक के दौर में बाजार की सुरक्षा केवल किसी एक संस्थान की जिम्मेदारी नहीं रह सकती। इसके लिए पूरे पूंजी बाजार से जुड़े संस्थानों, ब्रोकर्स और ट्रेडिंग सदस्यों को मिलकर काम करना होगा। इसी उद्देश्य से उन्होंने एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया (ANMI) से साइबर सुरक्षा के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाने की अपील की।
NSE Cybersecurity के सामने AI हैकिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग की चुनौती क्या है?
आशीष चौहान ने वैश्विक स्तर पर एआई आधारित साइबर हमलों की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के हफ्तों में स्वचालित हैकिंग के नए मामले सामने आए हैं। उनके बयान के मुताबिक, जापान को राष्ट्रीय साइबर आपातकाल घोषित करना पड़ा और अमेरिका में बड़े बैंकों के बुनियादी ढांचे पर एआई इंजनों के माध्यम से हमले हुए।
इन घटनाओं के संदर्भ में एनएसई अपनी तकनीकी प्रणालियों की लगातार समीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य संभावित कमजोरियों की पहचान करना और किसी साइबर हमले से पहले सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करना है।
चौहान ने क्वांटम कंप्यूटिंग से पैदा होने वाले दीर्घकालिक जोखिम पर भी जोर दिया। उन्होंने आगाह किया कि क्वांटम तकनीक में प्रगति मौजूदा एसएसएल (SSL) क्रिप्टोग्राफिक मानकों को चुनौती दे सकती है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव का इंतजार करने के बजाय अभी से तैयारी शुरू करना जरूरी है।
उनका कहना था कि वित्तीय संस्थानों को भविष्य में ऐसी तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिनसे निपटने के लिए मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों को समय रहते उन्नत करना होगा।
ANMI की साइबर सुरक्षा टास्क फोर्स क्या करेगी?
एनएसई प्रमुख ने पूंजी बाजार के सभी प्रतिभागियों को साइबर हैकिंग से बचाने के लिए साझा सुरक्षा ढांचा तैयार करने की जरूरत बताई। उन्होंने एएनएमआई से विशेष टास्क फोर्स बनाने का आग्रह किया, ताकि एक्सचेंज के सदस्य और ब्रोकर्स तकनीकी खतरों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
इस प्रस्ताव के तहत दो प्रमुख प्राथमिकताएं सामने रखी गई हैं।
अगले एक से तीन साल में सदस्यों को सुरक्षा संबंधी सहायता
टास्क फोर्स का उद्देश्य अगले एक से तीन वर्षों के भीतर सभी सदस्यों को तकनीकी मार्गदर्शन देना, उनके सिस्टम की कमजोरियों का परीक्षण करना और एआई संचालित हैकिंग से बचाव की तैयारी में मदद करना होगा। इससे सदस्यों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था की कमियां पहचानने और उन्हें दूर करने में सहायता मिल सकती है।
क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा अपग्रेड
दूसरी प्राथमिकता मौजूदा एसएसएल सुरक्षा मानकों को उन्नत करना और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के अनुरूप नया सुरक्षा चक्र तैयार करना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्वांटम कंप्यूटिंग के विकसित होने के साथ वित्तीय लेनदेन और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा कमजोर न पड़े।
शेयर बाजार के आम निवेशकों को इस पहल से क्या फायदा हो सकता है?
साइबर सुरक्षा में सुधार का सीधा संबंध उन करोड़ों लोगों के भरोसे से है, जो शेयर बाजार में निवेश करते हैं या ट्रेडिंग करते हैं। निवेशकों के डीमैट खातों में रखी प्रतिभूतियों, ब्रोकरेज खातों और ट्रेडिंग से जुड़ी वित्तीय जानकारी की सुरक्षा के लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था जरूरी है।
यदि ब्रोकर्स और ट्रेडिंग सदस्यों के सिस्टम में सुरक्षा संबंधी कमियां कम होती हैं, तो साइबर सेंधमारी, खातों तक अनधिकृत पहुंच और ब्रोकर स्तर पर होने वाली धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
प्रस्तावित टास्क फोर्स के जरिए सदस्यों की तकनीकी कमजोरियों की पहचान, सुरक्षा परीक्षण और एआई आधारित हमलों से बचाव पर ध्यान दिया जाएगा। इससे निवेशकों के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और उनसे जुड़ी संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
हालांकि, साइबर सुरक्षा के किसी भी उपाय से जोखिम पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं मिलती। इसलिए निवेशकों और वित्तीय संस्थानों, दोनों के लिए सतर्कता और सुरक्षा प्रक्रियाओं का नियमित पालन महत्वपूर्ण बना रहेगा।
SEBI के सुधारों से ट्रेडिंग सदस्यों को क्या राहत मिली?
सम्मेलन में आशीष चौहान ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे के नेतृत्व में किए गए नियामकीय सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य बाजार की अखंडता और निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखते हुए परिचालन संबंधी अड़चनों को कम करना है।
चौहान के अनुसार, सिंगल कॉमन रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत, रिपोर्टिंग की समय-सीमा बढ़ाने और तकनीकी गड़बड़ियों की रिपोर्टिंग में दी गई राहत जैसे कदमों से लगभग 60 प्रतिशत ट्रेडिंग सदस्यों को सीधा लाभ मिला है।
इन बदलावों से बाजार के सदस्यों के लिए नियामकीय अनुपालन की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने और परिचालन संबंधी दबाव कम करने में मदद मिली है।
NSE ने कौन-कौन से नए वित्तीय उत्पाद पेश किए हैं?
भारतीय पूंजी बाजार में उत्पादों के विस्तार का जिक्र करते हुए चौहान ने बताया कि कैश इक्विटी के बाद एनएसई ने इक्विटी, करेंसी, कमोडिटी और बिजली डेरिवेटिव्स जैसे क्षेत्रों में अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स (EGR) भी पेश किए गए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट्स के जरिए सोने से जुड़े निवेश को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने और कारोबार करने की व्यवस्था मिलती है। इससे बाजार में निवेश के विकल्पों का विस्तार होता है।
इसके अलावा, कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई गई। यह उत्पाद कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन और निवेश रणनीतियों के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध करा सकता है। हालांकि, इसकी मंजूरी और लॉन्च की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित नियामकीय घोषणा से की जानी चाहिए।
भारतीय पूंजी बाजार कितना बड़ा हो चुका है?
भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार को रेखांकित करते हुए एनएसई प्रमुख ने बताया कि देश का सूचीबद्ध बाजार पूंजीकरण लगभग 460 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उनके अनुसार, यह आकार बैंकिंग प्रणाली के कुल क्रेडिट बेस और बैलेंस शीट के संयुक्त आकार से भी अधिक हो चुका है।
उन्होंने बाजार की वृद्धि और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से जुड़े कई आंकड़े भी साझा किए।
- दीर्घकालिक वृद्धि: पिछले तीन दशकों में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 17 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है।
- देशव्यापी पहुंच: शेयर बाजार की पहुंच भारत के 99 प्रतिशत से अधिक पिन कोड तक हो गई है।
- निवेशक आधार: पंजीकृत निवेशक खातों की संख्या 27 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।
- व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी: सूचीबद्ध बाजार मूल्य में व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी 19.3 प्रतिशत बताई गई।
ये आंकड़े भारतीय पूंजी बाजार के बढ़ते आकार और व्यापक पहुंच को दर्शाते हैं। इसके साथ ही, बाजार के डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ती है, क्योंकि अधिक निवेशकों और बड़े लेनदेन के साथ तकनीकी व्यवधानों का प्रभाव व्यापक हो सकता है।
विकसित भारत 2047 में NSE की क्या भूमिका होगी?
विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय मौजूदा लगभग 3,000 डॉलर के स्तर से बढ़कर 25,000 से 30,000 डॉलर की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखती है।
इस आर्थिक बदलाव में एनएसई और एएनएमआई जैसे वित्तीय संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मजबूत पूंजी बाजार कंपनियों को पूंजी जुटाने, निवेश के अवसर उपलब्ध कराने और आर्थिक गतिविधियों को वित्तीय समर्थन देने में मदद कर सकता है।
लेकिन बाजार के विस्तार के साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा बनाए रखना भी जरूरी होगा। एआई आधारित साइबर हमलों और क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े संभावित जोखिमों के बीच वित्तीय संस्थानों को तकनीकी तैयारियों में लगातार निवेश करना होगा।
पूंजी बाजार की सुरक्षा के लिए सामूहिक तैयारी जरूरी
आशीष चौहान की चेतावनी का मुख्य संदेश यह है कि भारतीय पूंजी बाजार की बढ़ती ताकत को सुरक्षित रखने के लिए साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। एनएसई की प्रणालियों की नियमित समीक्षा, एएनएमआई के स्तर पर प्रस्तावित विशेष टास्क फोर्स, ब्रोकर्स की तकनीकी कमजोरियों का परीक्षण और क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा का उन्नयन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।
इसके साथ ही, सेबी के परिचालन सुधार और नए वित्तीय उत्पाद बाजार के विकास में भूमिका निभा सकते हैं। दीर्घकालिक चुनौती यह होगी कि तकनीकी नवाचार और बाजार के विस्तार के साथ निवेशकों की संपत्तियों, सूचनाओं और वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा भी बना रहे।
