DRDO Semiconductor Technology: जानिए देश को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या है सरकार का प्लान
दिल्ली के ESTIC-2026 सम्मेलन में सेमीकंडक्टर और चिप्स पर होगा बड़ा मंथन
DRDO Semiconductor Technology: नई दिल्ली। ग्लोबल टेक वर्ल्ड में आज जिस देश के पास अपनी खुद की सेमीकंडक्टर और माइक्रोचिप डिजाइनिंग की ताकत है, वही भविष्य की महाशक्ति बनने की रेस में सबसे आगे है। इसी सामरिक और तकनीकी मोर्चे पर भारत को पूरी तरह आत्मनिर्भर तथा डिजिटल रूप से संप्रभु बनाने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी मोर्चा संभाल लिया है।
राजधानी नई दिल्ली के प्रतिष्ठित ‘भारत मंडपम’ में आगामी 27 से 29 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित होने जा रहे बहुप्रतीक्षित ‘उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन’ (ESTIC-2026) के दौरान डीआरडीओ सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप्स पर केंद्रित एक विशेष सत्र की अगुवाई करने जा रहा है। इस राष्ट्रीय आयोजन का मूल उद्देश्य देश में स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देना और रक्षा समेत तमाम अहम क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता को समाप्त करना है।
क्या है ESTIC-2026 सम्मेलन का विजन और कौन-सी दिग्गज हस्तियां करेंगी शिरकत?
रक्षा मंत्रालय और आधिकारिक विवरणों के मुताबिक, केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में देश के 12 प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के संयुक्त तत्वावधान में इस विशाल सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह पूरी पहल ‘विकसित भारत @ 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को विज्ञान, तकनीक और उन्नत अनुसंधान के जरिए जमीन पर उतारने के लिए तैयार की गई है।
इस सम्मेलन के तहत डीआरडीओ द्वारा आयोजित होने वाले विशेष सत्र में देश-विदेश के रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञ, चिप डिजाइनिंग के धुरंधर, प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के निदेशक, स्टार्टअप्स और चिप निर्माण से जुड़े संगठन एक साझा मंच पर जुटेंगे। इस उच्चस्तरीय सत्र की भव्य शुरुआत माइक्रोन इंडिया के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के मुख्य भाषण (Keynote Address) से होगी।
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इसके बाद, भारत सेमी और नेत्रासेमी के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ-साथ प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मद्रास के निदेशक भी सत्र को संबोधित करेंगे और अपने बहुमूल्य विचार साझा करेंगे। इस दौरान मुख्य रूप से अत्याधुनिक चिप डिजाइनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंप्यूटिंग के लिए विशेष रूप से तैयार होने वाली चिप्स, आधुनिक माइक्रोप्रोसेसर और भविष्य की उभरती हुई तकनीकों के रोडमैप पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा।
भारत के सामरिक और आर्थिक भविष्य के लिए क्यों जरूरी है सेमीकंडक्टर क्रांति?
आज हमारे दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले स्मार्टफोन, आधुनिक वाहन, औद्योगिक मशीनें, टेलीकॉम नेटवर्क से लेकर जटिल रक्षा प्रणालियों तक, सब कुछ सेमीकंडक्टर चिप्स की रीढ़ पर टिके हैं।
हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित एक पूर्व-कार्यक्रम के दौरान डीआरडीओ के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली महानिदेशक बी. के. दास ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि drdo semiconductor technology और नेक्स्ट-जेन चिप्स का विकास देश की आर्थिक प्रतिस्पर्धा, डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से कितना अनिवार्य है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को केवल चिप्स के आयात पर निर्भर रहने के बजाय चिप डिजाइनिंग से लेकर फैब्रिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग तक का एक मजबूत, स्वदेशी और सुरक्षित इकोसिस्टम तैयार करना होगा। ऐसा करने से न केवल देश की तकनीकी क्षमता में भारी इजाफा होगा, बल्कि भविष्य की किसी भी वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) के संकट या भू-राजनीतिक अस्थिरता से भी देश सुरक्षित रह सकेगा।
DRDO Semiconductor Technology: रक्षा मंत्रालय के प्रदर्शनी स्टॉल पर दिखेगी स्वदेशी नवाचार की अद्भुत झलक
यह सम्मेलन केवल सैद्धांतिक चर्चाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारत की वैज्ञानिक ताकत का जीवंत प्रदर्शन भी देखने को मिलेगा। ESTIC-2026 के प्रांगण में रक्षा मंत्रालय का एक विशेष और भव्य प्रदर्शनी स्टॉल स्थापित किया जाएगा, जिसमें डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं (Laboratories) द्वारा विकसित अनगिनत स्वदेशी तकनीकों (drdo semiconductor technology) और अत्याधुनिक अनुसंधान कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा।
इस प्रदर्शनी में निम्नलिखित प्रमुख नवाचार आकर्षण का केंद्र होंगे:
- अत्याधुनिक संचार एवं क्वांटम तकनीक: सामरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए उन्नत संचार प्रणालियों और क्वांटम टेक्नोलॉजी के उन्नत प्रोटोटाइप।
- विशेष सैन्य व सुरक्षा गियर: अत्यधिक ठंडे मौसम और सियाचिन जैसे दुर्गम इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए थर्मल वस्त्र।
- महिला सुरक्षा और शारीरिक सहायता उपकरण: महिलाओं की सुरक्षा और आत्मरक्षा को मजबूत करने के लिए तैयार ‘प्राबला’ फुल-बॉडी प्रोटेक्टर, तथा सैनिकों की शारीरिक क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाले पैसिव और पावर्ड एक्सोस्केलेटन।
- ऊर्जा प्रबंधन एवं लेजर सिस्टम: फील्ड ऑपरेशन के लिए पोर्टेबल हाइब्रिड ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली और उच्च शक्ति वाले पल्स लेजर डायोड।
- एयरोस्पेस इंजीनियरिंग: भविष्य की हाइपरसोनिक उड़ानों और मिसाइलों के लिए गेमचेंजर साबित होने वाली स्वदेशी स्क्रैमजेट इंजन तकनीक।
इन तमाम प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य देश की जनता और रक्षा जगत को यह दिखाना है कि भारत आज विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में कितनी तेजी से आत्मनिर्भरता के नए मील के पत्थर गढ़ रहा है।
क्या इससे देश में सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक का विकास तेज होगा?
निसंदेह, इस सम्मेलन के माध्यम से उद्योग जगत (Industry), अकादमिक संस्थानों (Academic Institutions), तकनीकी स्टार्टअप्स और रिसर्च बॉडीज के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण होगा। चिप निर्माण, डिजाइनिंग, एआई कंप्यूटिंग और डिफेंस एप्लीकेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर होने वाली यह चर्चा देश में तकनीकी संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी।
सरकार का यह विजन ‘विकसित भारत @ 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। जब डीआरडीओ जैसी संस्थाएं आगे आकर drdo semiconductor technology के क्षेत्र में स्वदेशी तंत्र को गति देंगी, तो न केवल देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग को दीर्घकालिक रफ्तार मिलेगी, बल्कि भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर मैप पर एक आत्मनिर्भर और मजबूत राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आएगा।
