Uttar Pradesh Mahanavami Holiday: महानवमी पर सार्वजनिक अवकाश की उठी जोरदार मांग

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ ने सीएम योगी को भेजा पत्र: जानिए काशी पंचांग के अनुसार कन्या पूजन और तिथियों का पूरा गणित
Uttar Pradesh Mahanavami Holiday: लखनऊ ब्यूरो। शरद नवरात्र का पावन पर्व अपने पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है और इसी के साथ राजधानी लखनऊ से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक नया प्रशासनिक व धार्मिक मुद्दा गरमा गया है। क्या उत्तर प्रदेश में शारदीय नवरात्रि के दौरान महानवमी के मौके पर एक दिन का अतिरिक्त अवकाश घोषित किया जाएगा? इस सवाल ने इस समय राज्यभर के शिक्षक और कर्मचारी संगठनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
लगातार छुट्टियों के समीकरण को साधते हुए विभिन्न कर्मचारी संघों ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्य सचिव को आधिकारिक पत्र भेजकर मांग की है कि 19 अक्टूबर को महानवमी के पावन अवसर पर सार्वजनिक अवकाश (Uttar Pradesh Mahanavami Holiday) घोषित किया जाए।
क्यों उठ रही है 19 अक्टूबर की छुट्टी की मांग? लंबा वीकेंड बनने का पूरा समीकरण
आमतौर पर त्योहारी सीजन में मिलने वाली छुट्टियां कर्मचारियों और आम जनता के लिए राहत का बड़ा सबब होती हैं। इस साल अक्टूबर महीने के मध्य में पड़ रहे त्योहारों के दिनों का गणित कुछ इस तरह बैठ रहा है कि शिक्षक और कर्मचारी संगठन एक विस्तारित अवकाश (Long Weekend) की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
कैलेंडर के हिसाब से 18 अक्टूबर को रविवार का दिन है, जो साप्ताहिक अवकाश होता है। इसके ठीक बाद 20 अक्टूबर को दशहरे (विजयदशमी) का मुख्य पर्व है, जिसकी छुट्टी तय मानी जाती है।
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ऐसे में यदि बीच में पड़ने वाली 19 अक्टूबर (सोमवार) को भी सरकार द्वारा सार्वजनिक अवकाश (Uttar Pradesh Mahanavami Holiday) घोषित कर दिया जाए, तो कर्मचारियों को लगातार तीन दिनों (रविवार, सोमवार और मंगलवार) का अवकाश एक साथ मिल जाएगा। संगठनों का तर्क है कि इस निरंतर छुट्टी के मिलने से न केवल शिक्षक और कर्मचारी सुकून महसूस करेंगे, बल्कि वे महानवमी के सभी पारंपरिक और धार्मिक अनुष्ठानों में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हो सकेंगे।
कन्या पूजन और तिथियों का ज्योतिषीय स्वरूप: क्या कहते हैं पंडित?
शारदीय नवरात्र के इन पवित्र दिनों में महाअष्टमी और महानवमी के अवसर पर कन्या पूजन का सनातन संस्कृति में अत्यधिक महत्व माना गया है। आम तौर पर लोग अपनी सुविधा और पंचांग के अनुसार इन तिथियों का चयन करते हैं।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल द्वारा दी गई जानकारी और काशी पंचांग के विस्तृत विश्लेषण के मुताबिक, इस वर्ष तिथियों का क्रम कुछ इस प्रकार बन रहा है:
- महाअष्टमी तिथि: 18 अक्टूबर को सुबह 5:54 बजे से शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह 6:53 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसके अनुसार, अष्टमी का कन्या पूजन 18 अक्टूबर को किया जाएगा।
- महानवमी तिथि: 19 अक्टूबर को सुबह 6:53 बजे से आरंभ होकर 20 अक्टूबर को सुबह 9:34 बजे तक रहेगी।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, श्रद्धालु चाहें तो 20 अक्टूबर को सुबह 9:34 बजे तक भी नवमी तिथि के भीतर कन्या पूजन संपन्न कर सकते हैं। इसके बाद दशमी तिथि का प्रवेश हो जाएगा। इसी दिन यानी 20 अक्टूबर को व्रत का पारण, मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन और विजयदशमी का भव्य पर्व मनाया जाएगा।
क्या है कन्या पूजन की पारंपरिक विधि?
सनातन परंपरा में महानवमी और महाअष्टमी के दिन नौ छोटी कन्याओं को प्रत्यक्ष मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका विशेष सत्कार किया जाता है। इस अनुष्ठान के तहत कन्याओं के चरण धोए जाते हैं, उनके माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाया जाता है, उन्हें पवित्र चुनरी ओढ़ाई जाती है और इसके बाद आदर के साथ हलवा, पूरी और काले चने का सात्विक भोजन कराया जाता है।
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इसके अलावा, इस पूरी परंपरा में एक बालक को बटुक भैरव का स्वरूप मानकर उसे भी विशेष रूप से भोजन कराने का विधान है। यही वजह है कि शिक्षक और कर्मचारी इन धार्मिक आयोजनों को बिना किसी जल्दबाजी या दफ्तर की चिंता के संपन्न करना चाहते हैं।
क्या राज्य सरकार स्वीकार करेगी यह मांग?
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन समेत कई प्रमुख शिक्षक-कर्मचारी संगठनों ने जिस प्रकार से मुख्यमंत्री के समक्ष यह प्रस्ताव (Uttar Pradesh Mahanavami Holiday) रखा है, उससे प्रशासनिक स्तर पर भी विचार-विमर्श शुरू होना तय माना जा रहा है।
हालांकि, अभी तक शासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन राज्य के लाखों कर्मचारियों की निगाहें अब मुख्यमंत्री कार्यालय के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं। यदि यह अवकाश मंजूर होता है, तो प्रदेश के शिक्षण संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में उत्सव का माहौल और अधिक व्यापक हो जाएगा।
