Yogi Adityanath Vijayadashami Speech: समाज को बांटने वालों पर योगी का निशाना

राम मंदिर से लेकर सनातन परंपरा तक कही ये बातें
गोरखपुर। Yogi Adityanath Vijayadashami Speech: विजयादशमी के अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सामाजिक एकता, धार्मिक विरासत और राष्ट्र की मजबूती को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।
गोरखपुर के मानसरोवर रामलीला मैदान में आयोजित भगवान श्रीराम के राजतिलक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर समाज को बांटने वाली मानसिकता देश को कमजोर करती है। मुख्यमंत्री ने ऐसी प्रवृत्तियों की तुलना रावण की विचारधारा से की और लोगों से सामाजिक एकता बनाए रखने की अपील की।
Yogi Adityanath Vijayadashami Speech में राम जन्मभूमि की ऐतिहासिक पीड़ा, अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संदेश का भी उल्लेख हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की मजबूती उसकी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा और सम्मान से जुड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा और एकता के बिना किसी व्यक्ति, समाज या जाति की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
Yogi Adityanath Vijayadashami Speech: जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बंटवारे को लेकर क्या बोले योगी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन (Yogi Adityanath Vijayadashami Speech) में कहा कि समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर विभाजित करने वाले लोग भारत की सामूहिक शक्ति को कमजोर करते हैं। उनके अनुसार, ऐसी सोच सामाजिक एकता को खंडित करने का काम करती है और इसका असर देश की सांस्कृतिक पहचान पर भी पड़ता है।
उन्होंने विजयादशमी के पर्व को सत्य, धर्म और एकता के मूल्यों से जोड़ते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री का संदेश था कि समाज को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट रहना चाहिए।
योगी ने कहा कि जब भारत कमजोर पड़ता है, तब उसकी विरासत और धार्मिक स्थलों की गरिमा पर भी आघात होता है। उन्होंने इसी संदर्भ में अयोध्या की राम जन्मभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 500 वर्ष पहले उसके सम्मान को ठेस पहुंचाई गई थी।
राम जन्मभूमि से काशी विश्वनाथ तक, सांस्कृतिक विरासत पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन (Yogi Adityanath Vijayadashami Speech) में राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि, काशी विश्वनाथ मंदिर और सोमनाथ मंदिर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की कमजोरी का असर उसकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत पर पड़ता है।
योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, जब देश कमजोर होता है, तब राम जन्मभूमि और कृष्ण जन्मभूमि जैसी आस्था से जुड़ी जगहों को अपमान का सामना करना पड़ता है। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर पर हुए आघात और सोमनाथ मंदिर को तोड़े जाने तथा लूटे जाने का भी जिक्र किया।
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मुख्यमंत्री ने इस विषय को नारी गरिमा से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि देश की कमजोरी का असर महिलाओं के सम्मान पर भी पड़ता है। इसके विपरीत, एक मजबूत भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक गौरव और परंपराओं को पुनः स्थापित करने की क्षमता रखता है।
इन टिप्पणियों के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय मजबूती और सांस्कृतिक संरक्षण को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर क्या बोले सीएम योगी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने 500 वर्ष पहले अपमानित हुई राम जन्मभूमि की गरिमा को पुनः स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को इसका उदाहरण बताया।
योगी ने कहा कि राम जन्मभूमि का विषय केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक स्मृति और ऐतिहासिक पहचान से भी संबंधित है। उनके अनुसार, देश की मजबूती से ही अपनी विरासत और गौरव को सुरक्षित रखने तथा पुनः स्थापित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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मुख्यमंत्री ने राम मंदिर को लेकर कथित दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने की कोशिशों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान रामभक्तों पर अत्याचार करने वाले कुछ लोग आज राम-राम का उद्घोष कर रहे हैं।
कालनेमि का उदाहरण देकर योगी ने किसे पहचानने की अपील की?
राम मंदिर को लेकर अपने बयान (Yogi Adityanath Vijayadashami Speech) में मुख्यमंत्री ने पौराणिक पात्र कालनेमि का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कालनेमि भी राम का नाम लेता था। इसी संदर्भ में उन्होंने लोगों से बजरंगबली की तरह ऐसे लोगों को पहचानने का आह्वान किया, जिनके कथन और वास्तविक मंशा में अंतर होने का उनका आरोप है।
यह टिप्पणी राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर से जुड़े राजनीतिक विमर्श के संदर्भ में आई। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में लोगों को सतर्क रहने तथा धार्मिक प्रतीकों और नारों के आधार पर ही किसी की मंशा तय नहीं करने, बल्कि उसके आचरण को पहचानने का संदेश दिया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत के बारे में दुष्प्रचार करने वाली ताकतें देश के भीतर भी मौजूद हैं और विदेश से भी प्रायोजित होती हैं। उनके अनुसार, ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य भारत की एकता और मजबूती को प्रभावित करना है।
‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ का क्या है संबंध?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय ऋषि परंपरा के प्रसिद्ध मंत्र ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ का उल्लेख किया। उन्होंने इसका भाव समझाते हुए कहा कि सभी के सुख, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करना भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है।
उन्होंने इस विचार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संदेश से भी जोड़ा। मुख्यमंत्री के अनुसार, भारतीय परंपरा किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी के कल्याण और समृद्धि की कामना करती है।
इस संदेश में सामाजिक सद्भाव और समान अवसरों की अहमियत भी निहित है। उन्होंने सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत विभिन्न जातियों, संप्रदायों और मतों को सुरक्षा देने तथा बिना भेदभाव समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देती है।
‘देश है तो धर्म है’, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर योगी का संदेश
अपने संबोधन (Yogi Adityanath Vijayadashami Speech) में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘देश है तो धर्म है और धर्म है तो हम सब हैं।’ उन्होंने इस विचार के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता के महत्व को रेखांकित किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई व्यक्ति, समाज या जाति तब तक सुरक्षित नहीं हो सकती, जब तक भारत सुरक्षित नहीं है। उनके अनुसार, देश की सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह समाज की एकता, सांस्कृतिक विरासत और नागरिकों के भविष्य से भी जुड़ी है।
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मुख्यमंत्री ने सनातन परंपरा को सभी समुदायों के संरक्षण और समान अवसरों के संदेश से जोड़ते हुए कहा कि समाज को भेदभाव से ऊपर उठकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विजयादशमी के अवसर पर सत्य, धर्म, सामाजिक एकता और राष्ट्र की मजबूती को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
योगी आदित्यनाथ के विजयादशमी संबोधन के मुख्य संदेश
मुख्यमंत्री के भाषण में कुछ प्रमुख विषय सामने आए:
- सामाजिक एकता: जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों से बचने की अपील।
- सांस्कृतिक विरासत: राम जन्मभूमि, कृष्ण जन्मभूमि, काशी विश्वनाथ और सोमनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का उल्लेख।
- राम मंदिर: अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को राम जन्मभूमि की गरिमा से जोड़ना।
- दुष्प्रचार का आरोप: भारत और राम मंदिर को लेकर कथित भ्रामक प्रचार के प्रति सतर्क रहने की बात।
- सर्वजन कल्याण: ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के जरिए सबके सुख और समृद्धि की कामना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: देश की सुरक्षा को व्यक्ति, समाज और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा से जोड़ना।
योगी आदित्यनाथ के विजयादशमी संबोधन (Yogi Adityanath Vijayadashami Speech) में सामाजिक एकता, भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख विषय रहे। मुख्यमंत्री ने जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों पर चिंता जताई, अयोध्या के राम मंदिर का उल्लेख किया और सनातन परंपरा को सर्वजन कल्याण से जोड़ा। उनका संदेश था कि देश की मजबूती, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए समाज को एकजुट रहना चाहिए।
