Drug-Free India 2029: अमित शाह ने बताया नशा-मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य, पुलिस से की खास अपील

पुलिस स्मृति दिवस पर गृह मंत्री ने ड्रग्स को देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चुनौती बताया
नई दिल्ली। Drug-Free India 2029: भारत को नशे की समस्या से मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2029 की समयसीमा तय की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार, 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर इस लक्ष्य की घोषणा करते हुए देशभर के पुलिस बलों से नशीले पदार्थों के खिलाफ एकजुट होकर अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के बचे हुए समय और अगले तीन वर्षों में इस दिशा में पूरी मजबूती के साथ काम करने की जरूरत है।
दिल्ली स्थित नेशनल पुलिस मेमोरियल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि Drug-Free India 2029 का लक्ष्य हासिल करना देश के लिए महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, नशीले पदार्थों की समस्या केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर देश की आने वाली पीढ़ियों, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ता है।
31 दिसंबर 2029 तक नशा-मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य क्या है?
पुलिस स्मृति दिवस पर अपने संबोधन में अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत से ड्रग्स की समस्या को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा, ‘हमने 31 दिसंबर, 2029 तक भारत से ड्रग्स की समस्या को खत्म करने का लक्ष्य रखा है।’
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए गृह मंत्री ने वर्ष 2026 के शेष महीनों और इसके बाद आने वाले तीन वर्षों के दौरान लगातार प्रयास करने पर जोर दिया। उन्होंने देश के सभी पुलिस बलों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नशा-मुक्त भारत का रोडमैप तैयार करने और उसे पूरी दृढ़ता के साथ लागू करने की अपील की।
शाह के संदेश का प्रमुख हिस्सा यह था कि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने पुलिस बलों से इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए काम करने और युवाओं सहित आने वाली पीढ़ियों को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने का आह्वान किया।
ड्रग्स का खतरा देश के लिए गंभीर चुनौती क्यों है?
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में नशीले पदार्थों की समस्या के कई गंभीर पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ड्रग्स का खतरा आने वाली पीढ़ियों को नुकसान पहुंचाता है और देश की अर्थव्यवस्था पर अनावश्यक बोझ डालता है।
अमित शाह के मुताबिक, नशीले पदार्थों का कारोबार देशविरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों को आर्थिक मदद पहुंचाने का माध्यम भी बन सकता है। इस वजह से ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई को केवल नशे की समस्या तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। यह आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और देश की व्यापक सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है।
इसी संदर्भ में उन्होंने पुलिस बलों से नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने और सरकार के तय लक्ष्य की दिशा में दृढ़ संकल्प के साथ काम करने का आग्रह किया।
पुलिस स्मृति दिवस 2026 पर 154 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि
नशा-मुक्त भारत के लक्ष्य पर चर्चा के साथ अमित शाह ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीद जवानों के परिवारों के प्रति एकजुटता जताते हुए उनके बलिदान को याद किया।
गृह मंत्री ने बताया कि आजादी के बाद से अब तक कुल 36,852 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाई है। इनमें इस वर्ष शहीद हुए 154 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। शाह ने कहा कि देश के नागरिक इन जवानों और उनके परिवारों के बलिदान के लिए आभारी हैं।
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पुलिस स्मृति दिवस हर साल उन पुलिसकर्मियों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने देश की सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। यह दिन पुलिस बलों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी भूमिका को याद करने का अवसर भी है।
21 अक्टूबर को ही क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस?
पुलिस स्मृति दिवस का संबंध 21 अक्टूबर 1959 की एक ऐतिहासिक घटना से है। उस दिन लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में भारी हथियारों से लैस चीनी सैनिकों ने हमला किया था। इस घटना में भारत के 10 बहादुर पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवा दी थी।
इन जवानों के बलिदान की स्मृति में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर देशभर में कर्तव्य के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके योगदान को याद किया जाता है।
पुलिसकर्मियों के बलिदान और देश की सुरक्षा तथा एकता बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित नेशनल पुलिस मेमोरियल (NPM) को देश को समर्पित किया था।
नशा-मुक्त भारत और पुलिस की भूमिका पर क्या है आगे का संदेश?
अमित शाह की घोषणा के अनुसार, 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने का लक्ष्य आने वाले वर्षों में नशीले पदार्थों के खिलाफ प्रयासों की दिशा तय करेगा। उन्होंने पुलिस बलों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्धारित रोडमैप पर प्रतिबद्धता के साथ काम करने की अपील की है।
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में नशे से होने वाले सामाजिक नुकसान, आर्थिक बोझ और देशविरोधी गतिविधियों को मिलने वाली संभावित आर्थिक मदद को रेखांकित किया। साथ ही, पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देकर उन्होंने देश की सुरक्षा में पुलिस बलों के योगदान को भी याद किया।
इस तरह, पुलिस स्मृति दिवस 2026 पर दिया गया उनका संदेश दो महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा, एक ओर देश को नशीले पदार्थों की समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य और दूसरी ओर राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले पुलिसकर्मियों के बलिदान का सम्मान।
