Ravi Kumar Diwakar Transfer: मृत्युदंड के लिए चर्चित जज रवि कुमार दिवाकर का तबादला, जानिए, अब कौन सी मिली नई जिम्मेदारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन न्यायिय अधिकारियों की तैनाती में किया परिवर्तन
मुजफ्फरनगर। Ravi Kumar Diwakar Transfer: 23 मामलों में मृत्युदंड की सजा सुनाने के लिए चर्चा में रहे न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की न्यायिक जिम्मेदारी बदल दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन न्यायिक अधिकारियों की तैनाती में बदलाव करते हुए उन्हें परिवार न्यायालय में अपर प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया है। वहीं, मंजुला भलोटिया को महिला अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट भेजा गया है और शिव कुमारी को 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत गठित न्यायालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हाईकोर्ट ने किन अधिकारियों को कहां भेजा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, मुजफ्फरनगर में तीन न्यायिक अधिकारियों के पद बदले गए हैं। रवि कुमार दिवाकर (Ravi Kumar Diwakar Transfer) अब परिवार न्यायालय में अपर प्रधान न्यायाधीश के रूप में काम करेंगे। इससे पहले वह फास्ट ट्रैक कोर्ट में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर तैनात थे।
नई व्यवस्था के तहत मंजुला भलोटिया को फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा गया है। यहां उन्हें महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, शिव कुमारी को 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत गठित न्यायालय में तैनात किया गया है। वह इस न्यायालय में रवि कुमार दिवाकर की जगह जिम्मेदारी संभालेंगी।
हाईकोर्ट ने तीनों अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मौजूदा पद का कार्यभार सौंपने के बाद नई तैनाती वाले पद पर कार्यभार ग्रहण करें। कार्यभार सौंपने और नई जिम्मेदारी (Ravi Kumar Diwakar Transfer) संभालने से संबंधित प्रमाणपत्र सहायक रजिस्ट्रार (सर्विसेज) को भौतिक रूप से और आधिकारिक ईमेल के जरिए भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
23 मृत्युदंड के फैसलों के कारण चर्चा में आए थे दिवाकर
रवि कुमार दिवाकर मुजफ्फरनगर में अपने कार्यकाल के दौरान कई मामलों में मृत्युदंड सुनाने के कारण चर्चा में रहे। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने छह अप्रैल से सात सितंबर 2026 के बीच 10 मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
सात सितंबर 2026 को उन्होंने दहेज उत्पीड़न से जुड़े मामले में नदीम को मृत्युदंड सुनाया था। नदीम पर अपनी पत्नी को जलाकर मारने का दोष सिद्ध हुआ था। यह मुजफ्फरनगर में दिवाकर की अदालत का 23वां मृत्युदंड का फैसला बताया गया।
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मुजफ्फरनगर से पहले बरेली और अन्य स्थानों पर तैनाती के दौरान भी दिवाकर ने 13 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया था। इस तरह उनके न्यायिक सेवाकाल में कुल 35 दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने की रिपोर्ट है।
हालांकि, सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा पर अमल से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। इसलिए मृत्युदंड सुनाया जाना और सजा का अंतिम रूप से लागू होना अलग-अलग न्यायिक चरण हैं।
