गुजरात और असम में बाढ़ का कहर: गुजरात में 35, असम में 61 लोगों की मौत

7 लाख से अधिक प्रभावित; एनडीआरएफ-सेना राहत कार्य में जुटी
नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में मानसून का प्रकोप लगातार जारी है। गुजरात और असम में बाढ़ एवं भारी बारिश के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। गुजरात में पिछले दो दिनों के दौरान बारिश और बाढ़ से 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि असम में बाढ़ से 61 लोगों की जान जा चुकी है। असम के नौ जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
गुजरात में रिकॉर्ड बारिश, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात
गुजरात राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, शनिवार सुबह छह बजे तक बीते 24 घंटों में राज्य के 34 जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक वर्षा पाटन जिले के संतालपुर तालुका में 381 मिमी और राधनपुर तालुका में 342 मिमी रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा वाव-थराद के भाभर क्षेत्र में 287 मिमी बारिश दर्ज की गई। राज्य के 173 तालुकाओं में 250 मिमी से अधिक वर्षा होने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
42 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया, सेना और राहत एजेंसियां तैनात
भारी बारिश और जलभराव को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है। अब तक करीब 42 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि पिछले कुछ दिनों में 7 हजार से अधिक लोगों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है। प्रभावित जिलों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 18 टीमों तथा राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 32 टीमों को तैनात किया गया है। कई संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय सेना भी राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है।
अहमदाबाद और नवसारी में एनडीआरएफ का बड़ा रेस्क्यू अभियान
अहमदाबाद के ढोलका तालुका में बाढ़ के पानी में फंसे 103 लोगों को एनडीआरएफ ने सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं एक अन्य अभियान में नवसारी जिले के विभिन्न गांवों से 120 लोगों का रेस्क्यू किया गया और 43 अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
गर्भवती महिलाओं को नाव से अस्पताल पहुंचाया
बाढ़ के बीच राहत कार्य के दौरान अहमदाबाद ग्रामीण के भेटावाडा गांव में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को एनडीआरएफ की टीम ने नाव के जरिए 108 एंबुलेंस तक पहुंचाया, जहां से उसे सुरक्षित धोलका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। इससे पहले भी अहमदाबाद के दो गांवों से बाढ़ में फंसी गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव कराया गया था। मेडिकल टीमों ने समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर उनकी जान बचाई।
सौराष्ट्र के कई जिलों में रेड अलर्ट, नर्मदा बांध 68 प्रतिशत से अधिक भरा
राज्य ब्यूरो के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर गुजरात के साबरकांठा, बनासकांठा, पाटन और मेहसाणा, तथा सौराष्ट्र के सुरेंद्रनगर और मोरबी जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। हालांकि. दक्षिण गुजरात के कुछ हिस्सों में वर्षा की तीव्रता कम होने से राहत मिली है। इस बीच सरदार सरोवर नर्मदा बांध 68 प्रतिशत से अधिक भर चुका है, जिससे जल प्रबंधन पर प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है।
असम में 61 मौतें, 7.05 लाख से अधिक लोग प्रभावित
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। राज्य में बाढ़ संबंधी घटनाओं में 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नौ जिलों के 7.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने हिमंत बिस्वा सरमा से की बात
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बातचीत कर राज्य में बाढ़ की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने असम के लोगों को भरोसा दिलाया है कि केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों में हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी।
पालघर बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक सहायता
महाराष्ट्र के पालघर जिले में इस महीने की शुरुआत में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस आपदा में 20 लोगों की मौत हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में से 13 लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। इनमें से 12 मृतकों के कानूनी वारिसों को राज्य सरकार की आर्थिक सहायता के लिए पात्र घोषित किया गया है। प्रत्येक पात्र परिवार को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि स्वीकृत की गई है। अब तक आठ परिवारों को कुल 32 लाख रुपये की सहायता राशि जारी की जा चुकी है।
नगालैंड से बहकर असम पहुंचा हाथी सुरक्षित बचाया गया
बाढ़ के दौरान नगालैंड की पहाड़ियों से बहकर असम पहुंचे 53 वर्षीय पालतू हाथी को वन विभाग और बचाव दल ने सुरक्षित बचा लिया है। असम के वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने बताया कि यह हाथी नगालैंड के नामसांग क्षेत्र से बहकर ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी डिखो के रास्ते शिवसागर जिले के बिहुबोर पहुंच गया था।
शुक्रवार को हाथी का सफल रेस्क्यू कर उसका उपचार कराया गया। नजीरा मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट और नजीरा वेटेरिनरी डिस्पेंसरी की मेडिकल टीम ने मौके पर पहुंचकर हाथी की व्यापक स्वास्थ्य जांच और तत्काल इलाज किया। इलाज के बाद हाथी को सुरक्षित सिमालुगुरी के बलिघाट पहुंचाया गया, जहां वह वन अधिकारियों की निगरानी में आराम कर रहा है। वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने कहा कि यह अभियान उन राहतकर्मियों के समर्पण का उदाहरण है, जो बाढ़ के दौरान विस्थापित जंगली और पालतू जानवरों को बचाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
